राजस्थान जयपुर नागरिक सुरक्षा विभाग  को  संकट मोचन के नाम से जाना जाता आज इसके जवानों को जीवन यापन वह दयनीय स्थिति में है

जबकि पूरे राजस्थान मैं नागरिक सुरक्षा विभाग  के जवान आपदा में आने वाले कोई भी मुसीबत आती है बाढ़ नहर में कोई गिर तो उसको बाहर  निकलना कोई एक्सीडेंट हो जाए बड़ा हादसा कोई बिल्डिंग कर दिया है तो उसमें दबे हुए आदमियों को या कैजुअल्टी को निकालना यह काम आपदा प्रबंधन का जवानों का होता है पर यहां पर कुछ अधिकारियों ने अपने निजी  कामो के लिए  घरों में काम लिया जा रहा है जो वहां पर बच्चों को खिलाना बर्तन धोना खाना बनाना और पर्सनल गाड़ी चलाना के काम में लगा रखा है कई जगह अधिकारियों ने अपने ही नियम बना रखे हैं भरतपुर फायर प्रभारी जो है उनके जयपुर मुख्यालय नियम से अलग  ही नियम चल रहे हैं उन्होंने अपने अलग ही नियम बना रखे हैं जो हेड क्वार्टर के नियमों के धज्जियां उड़ा रहे हैं  इस ओर  किसी भी  प्रकार कोई ध्यान नहीं है प्रशासनिक अधिकारी का कोई ध्यान नहीं है कई जवान लगातार  5 या 6 महीने से एक ही अधिकारी के पास काम कर रहे हैं और कुछ  को 4 महीने 5 महीने से लगातार कोई रोजगार नहीं मिल रहा है क्या यह नियम के विरुद्ध नहीं है उन लड़कों को क्यों नहीं रोजगार मिल रहा है बाकी जो है नियम के अनुसार रोटेशन पर ड्यूटी आती है यह बेल्ट नंबर के अनुसार आती है जैसे 1से 24 तक ड्यूटी चल रही हैं अगले महीने बेल्ट नम्बर 25 से शुरू होगी  जयपुर हेड क्वार्टर के नियम के अनुसार जिले लेवल पर 12 जवानों  की ड्यूटी और संभाग लेवल पर 24 जवानों की ड्यूटी लगती है जो भी रोटेशन के हिसाब से होती है पर भरतपुर जिले में इसके विपरीत चल रहा है यहां पर 24 लड़कों में से 14 ड्राइवर  और चार लड़कियां ड्यूटी कर रही हैं बाकी सादा जवान लगते है बेल्ट नंबर के हिसाब से ड्यूटी लगती है पर अब वह एक तरफ है उनको अनदेखा किया जा रहा है 

अब अपनी मर्जी से ही ड्यूटी प्रभारी जी लगा रहे हैं उनके नियम सर्वमान्य है जयपुर हेड क्वार्टर के कोई भी नियम उनके लिए कोई महत्व नहीं रखते भरतपुर में जवानों के साथ बहुत अन्याय हो रहा है पूरे राजस्थान में हर जगह पर अधिकारियों द्वारा सिविल डिफेंस के जवानों का आपदा में मैं उपयोग ना लेकर अपने घरों पर अपने निजी कामों में अधिकारियों ने अपने अपने घरों पर लगा रखे हैं जबकि आप दा प्रबंधन सिविल डिफेंस एक संकट मोचन के नाम से भी जानी जाती है यह हर छोटी से छोटी घटना बड़ी से बड़ी घटना पर पहुंचकर लोगों की मदद करती है जहां पर भी कोई हादसा होता है तो तुरंत मौके पर पहुंच कर एक घायलों की हर तरह की मदद करती है  बाढ़ आ जाती है तो उसमें इन लोगों की उनको भी जान माल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम करती  कहीं कुए में या कहीं बावड़ी में कोई डेड बॉडी या कोई गिर जाता है तो उसको भी निकालना व नहर में से निकालना लोग कहीं कोई  बिल्डिंग गिरने पर उसमें दबे हुए लोगों को भी बाहर निकालने का काम करती है इस समय सिविल डिफेंस के जवानों बहुत ही दयनीय स्थिति में है जवान उनको रोजगार नहीं मिल पा रहा है साल में उनको दो या चार ड्यूटी मिलती हैं सरकार को उनके बारे में कुछ सोचना चाहिए  उनके रोजगार उनके परिवार का पालन पोषण कैसे होगा इसके बारे में भी सोचना चाहिए उनकी 12 सेवाओं में से छह सेवाएं निमित्त रोजगार उपलब्ध होनी चाहिए हम यह नहीं कह रहे कि हम को ज्यादा वेतन दिया जाए पर इतना  वेतन तो हो कि हम अपने परिवार का गुजर-बसर कर सकें परिवार को पाल सकें कोराना काल में  जवानों ने बहुत अच्छा ही काम किया था जिसमें उन्होंने दिन रात एक कर कोरोना में प्रचार करना और उनकी जानकारी आमजन तक खाना व दवा पहुंचाना तथा उनकी सेवा करना दिन-रात हॉस्पिटलों में अपनी सेवाएं व ड्यूटी थी हर जगह अपनी हर तहसील उन पर अपने गांव क्षेत्र ढाणी में जाकर सैनिटाइजर किया छिड़काव और लोगों की मदद की कार्य करते हुए हमारे सिविल डिफेंस के जवान कई कई जवान कार्य करते हुए तो अपनी  जान गवा दी  हो गए इसको देखते हुए हमारे जवानों को संविदा पर या नियमितीकरण किया जाना चाहिए हमारी यही एक मांग  है 

भरतपुर में नागरिक सुरक्षा विभाग में प्रभारी के द्वारा फायर प्रभारी पर लड़कों को 6 महीने से लगातार ड्यूटी दे रहे हैं अधिकारियों के यहां पर खाना बना रहे हैं और कई ड्राइवरों को लगातार ड्यूटी जा रही हैं जो सिविल डिफेंस के के नियम के विरुद्ध है नियम के अनुसार एक पारी में 1 ड्राइवर दो तैराक होने चाहिए एक शिफ्ट में 8 जवान होते हैं जिनमें एक ड्राइवर 2 तैराक और बाकी सिविल जवानों को लगाया जाता है जो हेल्पर का काम करते हैं यहां पर फायर प्रभारी ने अपने द्वारा हस्ताक्षर कर फर्जी आईकार्ड जारी कर रखे हैं जबकि यह काम जिला कलेक्टर या एसडीएम जो सिविल डिफेंस के R A S या I A S अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है आई कार्ड जारी करना पर इसका दुरुपयोग सिविल डिफेंस प्रभारी फायर प्रभारी कर रहे हैं और सिविल डिफेंस का हेड क्वार्टर से जयपुर संपर्क परेड 20 तारीख को साइन करने का दिन होता है जबकि फायर प्रभारी ने 3 शनिवार को साइन करने के अपना ही  नियम बना रखे हैं जो गलत है हेडक्वार्टर के अनुसार 20 तारीख को अगर छुट्टी होती है तो अगले दिन साइन किए जाते हैं संपर्क परेड के जो नियम उनसे उनका अनदेखा किया जा रहा है यहां पर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी  भी कोई ध्यान नहीं देता है इस मामले में  अगर कोई जवान  उनके खिलाफ जाता है तो उसको डिस्चार्ज व हटाने की धमकी भी मिल जाती है इस तरह के पहले भी काम हो चुके हैं कई जवानों जो सही बोलने वालो   जवानों को पहले भी हटाया जा चुका है इसके चलते कोई भी जवान अपनी बात अधिकारी के सामने नहीं रख पाता है – संवाददाता – भीम सिंह राजपूत

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: