आध्यात्मिक साधना उपासना के पर्व को आमोद प्रमोद मनोरंजन के रूप में मना कर मूल स्वरूप को नष्ट करने का पाप ना कमाए उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने जैन दिवाकर के प्रवचन हाल में नवरात्रिपूर्व संध्यासंबोधित करते कहा कि पर्व की गरिमा महिमा और सही स्वरूप के रूप में आने वाली पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना हम सब का प्रथम कर्तव्य है

उन्होंने कहा कि महापुरुषों ने त्याग और साधना के बल पर सिद्धियां प्राप्त की उन्हीं के नाम पर आडंबर दिखावा प्रदर्शन झूठी स्पर्धा कतई उचित नहीं है

मु नि कमलेश ने बताया कि पर्वों का लक्ष्य आत्मा के साथ लगे हुए विषय विकार और कर्मों से मुक्ति पाने का बनाएंगे तभी सार्थकता सिद्ध होगी

राष्ट्र संत ने स्पष्ट कहा कि पर्व को मनाने से पहले पर्यावरण रक्षा की ओर पूरा गंभीरता से ध्यान देना होगा सात्विकता और सादगी पर्व का असली प्राण है

जैन संत ने कहा कि लंपी वायरस के संकटकालीन समय में गौ माता की सेवा सुरक्षा और बीमारी से मुक्ति दिलाने के प्रयास करना सच्ची आराधना उपासना देवी की होगी

अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली के सक्रिय कार्यकर्ता दिलीप दक दिलीप मोगरा दलपत पितलिया अनिल मेहता अजीत मेहता महिला शाखा मेना मोगरा मंजू दक कनक धाकड़ गजेंद्र खाबिया कुसुम मोगरा रजनी खाबिया बड़ी सादड़ी का संघ की ओर से बहुमन किया गया – संवाददाता फारुक मेमन खेरालु

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