लघु कथा “मेहनत”

लघु कथा “मेहनत” झुमकी रोज़ अपनी माँ शांता के साथ काम पर जाती थी। वैसे माँ उसे ईंटें उठाने नहीं देती थी। वो छोटे भाई की देखभाल करती थी जो अभी बहुत छोटा था। झुमकी शांता के साथ सुबह जल्दी उठ जाती। जब तक शांता खाना बनाती और घर के काम करती झुमकी छोटे भाई के लिए काम पर ले जाने के लिए सारा सामान इक्कट्ठा कर लेती। एक दिन काम पर जाने के बाद झुमकी भाई को गोद में लेकर ही बैठी थी पीछे से एक कुत्ते ने दूध का बर्तन गिरा दिया और सारा दूध ज़मीन पर बिखर गया। भूख से उसका भाई रोने लगा तो वो दौड़ी दौड़ी पास के घर गयी और बेल बजाई। घर की मालकिन बाहर आई झुमकी ने दूध माँगा। तो मालकिन ज़ोर से चिल्लाई ,”आ जाते हैं मुंह उठाकर मांगने ,भाग यहाँ से । दूध चाहिए तो मेहनत करो पैसे कमाओ और दूध लाओ” । झुमकी उदास होकर वापिस मुड़ी और सोचने लगी और कितनी मेहनत करेंगे. – सविता गर्ग “सावी” कवयित्री, गीतकार, गायिका पंचकूला (हरियाणा)

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